महाराजा रणजीत सिंह – Biography of Maharaja Ranjit Singh in NEXT EXAM ONLINE

Biography of Maharaja Ranjit Singh in Hindi

सिख शासन की शुरुवात करने वाले महाराजा रणजीत सिंह ने उन्नीसवी सदी में अपना शासन शुरू किया, उनका शासन पंजाब प्रान्त में फैला हुआ था और उन्होने दल खालसा नामक एक संगठन का नेतृत्व किया था. उन्होने छोटे गुटों में बंटे हुए सिखों को एकत्रित किया. उनके बाद उनके पुत्र खड़ग सिंह ने सिख शासन की कमान संभाली.

महाराजा रणजीत सिंह ने मिसलदार के रूप में अपना लोहा मनवा लिया था और अन्य मिसलदारों को हरा कर अपना राज्य बढ़ाना शुरू कर दिया था. पजाब क्षेत्र के सभी इलाकों में उनका कब्ज़ा था पूर्व में अंग्रजों के और पश्चिम में दुर्रानी के राज्य के बीच में उनका राज्य था.




रंजित सिंग जी ने पुरे पुजाब को एक किया और सिख राज्य की स्थापना की. महाराजा रणजीत ने अफगानों के खिलाफ कई लड़ाइयां लड़ीं और पेशावर समेत पश्तून क्षेत्र पर अधिकार कर लिया. ऐसा पहली बार हुआ था कि पश्तूनो पर किसी गैर मुस्लिम ने राज किया हो। उसके बाद उन्होंने पेशावर, जम्मू कश्मीर और आनंदपुर पर भी अधिकार कर लिया। ब्रिटिश इतिहासकार जे टी व्हीलर के अनुसार, अगर वे एक पीढ़ी पुराने होते, तो पूरे भारत को जीत लेते।

Biography of Maharaja Ranjit Singh
Maharaja Ranjit Singh

रणजीतसिंह का जन्म सन् १७८० ई. में हुआ था। वह जाट समाज के पृतापि राजा थे महानसिंह के मरने पर रणजीतसिंह बारह वर्ष की अवस्था में मिस्ल सुकरचकिया के नेता हुए। सन् १७९८ ई. में जमान शाह के पंजाब से लौट जाने पर उन्होने लाहौर पर अधिकार कर लिया। धीरे-धीरे सतलज से सिंधु तक, जितनी मिस्लें राज कर रही थीं, सबको उसने अपने वश में कर लिया। सतलज और यमुना के बीच फुलकियों मिस्ल के शासक राज्य कर रहे थे। सन् १८०६ ई. में रणजीतसिंह ने इनको भी अपने वश में करना चाहा, परंतु सफल न हुए।



रणजीतसिंह में सैनिक नेतृत्व के बहुत सारे गुण थे। वे दूरदर्शी थे। वे साँवले रंग का नाटे कद के मनुष्य थे। उनकी एक आँख शीतला के प्रकोप से चली गई थी। परंतु यह होते हुए भी वह तेजस्वी थे। इसलिए जब तक वह जीवित थे, सभी मिस्लें दबी थीं।

Biography of Maharaja Ranjit Singh
Biography of Maharaja Ranjit Singh

उस समय अंग्रेजों का राज्य यमुना तक पहुँच गया था और फुलकियाँ मिस्ल के राजा अंग्रेजी राज्य के प्रभुत्व को मानने लगे थे। अंग्रेजों ने रणजीतसिंह को इस कार्य से मना किया। रणजीतसिंह ने अंग्रेजों से लड़ना उचित न समझा और संधि कर ली कि सतलज के आगे हम अपना राज्य न बढ़ाएँगे। रणजीतसिंह ने फ्रांसीसी सैनिकों को बुलाकर, उसकी सैनिक कमान में अपनी सेना को विलायती ढंग पर तैयार किया।




अब उनने पंजाब के दक्षिणी, पश्चिमी और उत्तरी भागों पर आक्रमण करना प्रारंभ किया और दस वर्ष में मुल्तान, पेशावर और कश्मीर तक अपने राज्य को बढ़ा लिया।

रणजीतसिंह ने पेशावर को अपने अधिकार में अवश्य कर लिया था, किंतु उस सूबे पर पूर्ण अधिकार करने के लिए उसे कई वर्षों तक कड़ा संघर्ष करना पड़ा था। वह पूरे पंजाब का स्वामी बन चुका; और उसे अंग्रेजों के हस्तक्षेप का सामना नहीं करना पड़ा।

रणजीत सिंह (Maharaja Ranjit Singh) दूरदर्शी राजनीतिज्ञ थे | उन्होंने जम्मू और कश्मीर को मिलाकर एक प्रभुता सम्पन्न शक्तिशाली राज्य का रूप दिया | यह राज्य तिब्बत के पश्चिमी सिंध के उत्तर और खैबर दर्रे से लेकर यमुना नदी के पश्चिमी तट तक एक भौगोलिक और राजनितिक इकाई था | उन्होंने न तो अंग्रेजो से युद्ध किया और न उनकी सेनाओं को अपने राज्य के अंदर आने दिया | काबुल के शासको ने पेशावर पर कब्जा करने के कई असफल प्रयत्न किये | 1849 में अंग्रेजो के अधिकार में आने तक यहा सिखों का आधिपत्य बना रहा |

Biography of Maharaja Ranjit Singh
Biography of Maharaja Ranjit Singh

59 वर्ष की उम्र में 1839 में रणजीत सिंह की मृत्यु हो गयी यद्यपि उसके 10 वर्ष बाद ही यह राज्य विच्छिन हो गया पर अपनी वीरता , राज्नितिग्यता और उदारता के लिए महाराजा रणजीत सिंह (Maharaja Ranjit Singh) को भारत के इतिहास में गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त है | उनकी सरकार साम्प्रदायिक आग्रहों से मुक्त थी और उसमे सभी समुदायों के लोग सम्मिलित थे |



उन्होंने ऊँचे पदों पर हिन्दू और मुसलमानों सभी योग्य व्यक्तियों को नियुक्त किया | कनिघम में लिखा है कि उनका राज्य जन-भावना पर आधारित था | हिस्ट्री आफ द सिख के लेखक के शब्दों में रणजीत सिंह सामान्य व्यक्ति नही थे वरन सम्पूर्ण पूर्व और पश्चिमी संसार में दुर्लभ मानसिक शक्तियों के स्वामी थे |

रोचक तथ्य

· महा सिंह और राज कौर के पुत्र रणजीत सिंह दस साल की उम्र से ही घुड़सवारी, तलवारबाज़ी, एवं अन्य युद्ध कौशल में पारंगत हो गये। नन्ही उम्र में ही रणजीत सिंह अपने पिता महा सिंह के साथ अलग-अलग सैनिक अभियानों में जाने लगे थे।

· महाराजा रणजीत सिंह को कोई औपचारिक शिक्षा नहीं मिली थी, वह अनपढ़ थे।

· अपने पराक्रम से विरोधियों को धूल चटा देने वाले रणजीत सिंह पर 13 साल की कोमल आयु में प्राण घातक हमला हुआ था। हमला करने वाले हशमत खां को किशोर रणजीत सिंह नें खुद ही मौत की नींद सुला दिया।




· बाल्यकाल में चेचक रोग की पीड़ा, एक आँख गवाना, कम उम्र में पिता की मृत्यु का दुख, अचानक आया कार्यभार का बोझ, खुद पर हत्या का प्रयास इन सब कठिन प्रसंगों नें रणजीत सिंह को किसी मज़बूत फौलाद में तबदील कर दिया।

· Maharaja Ranjit Singh का विवाह 16 वर्ष की आयु में महतबा कौर से हुआ था। उनकी सास का नाम सदा कौर था। सदा कौर की सलाह और प्रोत्साहन पा कर रणजीत सिंह नें रामगदिया पर आक्रमण किया था, परंतु उस युद्ध में वह सफलता प्राप्त नहीं कर सके थे।

· उनके राज में कभी किसी अपराधी को मृत्यु दंड नहीं दिया गया था। रणजीत सिंह बड़े ही उदारवादी राजा थे, किसी राज्य को जीत कर भी वह अपने शत्रु को बदले में कुछ ना कुछ जागीर दे दिया करते थे ताकि वह अपना जीवन निर्वाह कर सके।




· वो महाराजा रणजीत सिंह ही थे जिन्होंने हरमंदिर साहिब यानि गोल्डन टेम्पल का जीर्णोधार करवाया था।

· उन्होंने कई शादियाँ की, कुछ लोग मानते हैं कि उनकी 20 शादियाँ हुई थीं।

 

· महाराजा रणजीत सिंह न गौ मांस खाते थे ना ही अपने दरबारियों को इसकी आज्ञा देते थे।

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Author: NEXT EXAM ONLINE

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